वक्त फूलों की सुगंध की तरह है
आसपास बस बिखर जाती है
आप चाहे तो उसे अंदर तक
समाहित करे ,
आनन्दित हो ,
स्वयं को उस पल में जोड़ दे
या
बस वहाँ से गुजर जाएं
वक्त फूलों की सुगंध की तरह है
आसपास बस बिखर जाती है
आप चाहे तो उसे अंदर तक
समाहित करे ,
आनन्दित हो ,
स्वयं को उस पल में जोड़ दे
या
बस वहाँ से गुजर जाएं
कानों में आवाजों की परतें ,
उन परतों में ढेर सारी आवाजों के दृश्य ,
अनमयस्क सी बीत रहे पलों को जी कर
जब उनके बारे में सोचा तो,
वहाँ आवाजें नही थी ,
और वो अभी भी
कानो से आ रही एक धीमी
शोर से घिरा था।