apna sach

सोमवार, 1 सितंबर 2025

वक्त

वक्त फूलों की सुगंध की तरह है 

आसपास बस बिखर जाती है 


आप चाहे तो उसे अंदर तक 

 समाहित करे ,

आनन्दित हो ,

स्वयं को उस पल में जोड़ दे 

          या 

बस वहाँ से गुजर जाएं 


रविवार, 31 अगस्त 2025

संकेत

उसकी उपस्थिति ही ,
   उसकी अभिव्यक्ति थी 
बोलना ,
   उसकी  मौजूदगी की आहट
लिखना ,
    उसके होने की मान्यता 

स्वीकार्यता के इस खेल में ,
उसकी चुप्पी ,
एक विद्रोह था। 
   


दुविधा

दौड़ते दौड़ते लगा कि 
सारी दुनिया थमी हुई है 
          शांत है ,
बस मैं ही दौड़े जा रहा हूँ 

हाँ ,अब रुका हूँ थोड़ा 
कि आराम से देखूँ जरा 
क्या है आस पास 

सब भागे जा रहे जाने कहाँ 
हैरान परेशान 
और मैं ही हूँ  
पिछड़ते जा रहा हूँ सबसे 

शनिवार, 30 अगस्त 2025

आवाजें

 कानों में आवाजों की परतें ,

        उन परतों में ढेर सारी आवाजों के दृश्य ,

अनमयस्क सी बीत रहे पलों को जी कर 

जब उनके बारे में सोचा तो,

            वहाँ आवाजें नही थी ,

 और वो अभी  भी 

     कानो से आ रही एक धीमी  

       शोर से घिरा था। 

यादों की एक तह

 अतीत में 
अहसासों की एक याद
 वर्तमान में इस तरह गुजरता है
कि अतीत ही भविष्य का 
वर्तमान हो जाता है 
हम काल के एक चक्र में ऐसे
घूमते रहते है कि जहां समय तो रहता है
पर वह हमारी यादों से बंधा रहता है

मंगलवार, 18 जुलाई 2023

पास ही

खुद को ढूंढता हुआ मैं
खुद से बाहर निकलता हूँ
स्वयं में जब मैं होता हूँ
स्वयं का नही रहता
बहुत सी आवाजों में दबकर
स्वयं को बाहर निकालता हूँ
न मैं अन्दर रह पाता हूँ
और न ही बाहर
ये जो पास में बैठा शख्स है न
वो मैं ही बना बैठा  हूँ
अपने करीब में ।

गुरुवार, 27 अक्टूबर 2022

क्षरण

उसने कहा कि
खत्म हो जाना चाहिए तुम्हें अब तक
मैंने बोला
हो तो रहा हूँ मैं धीरे  धीरे,
खाली हो रहा हूँ अन्दर से,
बस मन ही भर गया हैं।